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एक दिन दिये ने खुद से खुद को पुछा

एक दिन दिये ने खुद से खुद को पुछा
स्वयं जलकर देता अंधकार का काम तमाम
क्या स्वयम जनता है ,या अपने संपन से है तू अंजान
दिया मुस्कुराया गुलाबी होंठ भड़फड़ाया
कंकड़ीली पत्थरो पर चलकर राम ने किया सबका उद्दार
मौन रही है सीता माता , लक्ष्मण ने सहे कष्ट तमाम
मेरी तो औकाद है मैंने तो सीखा है राम से ज्ञान
दिया बोला
दीपावली अब आयी है ,मेरे बढ़ गए है अब काम
भारत की मिट्टी शक्ति ,दीपक साँचा बना दिया
तेल बति का लिया सहारा ,अमावश्या पूर्णिमा बना दिया
चारों दिशाये रौशन कर दी ,जग पवन बना दिया
धन्वतरि के चरण पखारो धन तेरस मनाना है
छोटी दिवाली प्यारी दिवाली रूप सौन्दर्य पाना है
राम को अपने दिल में बसा लो बड़ी दिवाली सब मना लो
लक्ष्मी गणेश का करो सब पूजन ,धन धान्य आज सब पालो
गौवर्धन की करो परिकर्मा ,विश्वकर्मा दिवस सभी मना लो
सबसे पवन रिस्ता भाई बहन भैया दूज सभी मना लो
दीपक फिर मुस्कुराया
दिया फिर मुस्कुराया ,मेरी आँखों में अपनी ज्योति समाया
सारी खुशिया डाल दी मेरी झोली में ,मेरे राम से मुझे मिलाया
” काया पिजड़े को जो चलाये
सांस रूप है राम
मेरे तनमन सदा बसे
मेरे जय श्री राम ,मेरे जय श्री राम “

                                                                                   (   सुनीता कुमारी  टीचर पूर्वी दिल्ली नगर निगम )