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राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय ने किया आठवें थियेटर ओलंपिक्स 2018 का शंखनाद

नई दिल्ली: भारत में थियेटर के दीवानों को खुशियां मनाने का एक मौका मिला है. देश पहली बार दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय थियेटर महोत्सव की मेज़बानी करने के लिए तैयार है. इस आठवें थियेटर ओलंपिक्स के दौरान पूरे देश में नाट्य प्रस्तुतियों की श्रंखला में 30 देशों की भागीदारी होगी.

भारत के माननीय उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू इस 51 दिवसीय इस कार्यक्रम का उद्घाटन आगामी 17 फरवरी 2018 की शाम 6:30 बजे ऐतिहासिक लाल किले से करेंगे. इसके बाद इस भव्य आयोजन के अंतर्गत 17 भारतीय शहरों में 450 शो, 600 एंबिएंस पर्फामेंस और 250 दमदार यूथ फोरम शो किए जाएंगे, जिनमें पूरी दुनिया के 25,000 कलाकार शामिल होंगे. आगामी 8 अप्रैल 2018 को मुंबई के प्रतिष्ठित गेटवे ऑफ इंडिया में एक भव्य समारोह के साथ इसका समापन होगा.

देश में रंगमंच के इस शानदार महोत्सव का आयोजन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्तशासी संस्थान राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के तत्वावधान में किया जा रहा है. इस आठवें थियेटर ओलंपिक्स का विषय “फ्लैग ऑफ फ्रेंडशिप” रखा गया है जिसका लक्ष्य रंगमंच की कला के माध्यम से सरहदों को जोड़ना और विभिन्न संस्कृतियों, मतों और विचारधाराओं के लोगों को एक साथ लाना है.

इस भव्य महोत्सव में आमंत्रित अतिथियों में थियोडोरोस टेरज़ोपोलोस (चेयरमैन, थियेटर ओलंपिक अंतरराष्ट्रीय समिति, ग्रीस), लियु लिबिन (चीन), जैरोस्ला फ्रेट (पोलैंड), सहिका टेकंद (तुर्की), यूजिनो बार्बा (डेनमार्क), रोमियो कास्टेलुच्ची (इटली), पिपो डेलबोनो (इटली) और जैन फैबर (बेल्जियम) शामिल हैं. जबकि भारतीय रंगमंच की हस्तियों में रतन थियाम, एलेक पद्मसी, रुद्रप्रसाद सेनगुप्ता, एमके रैना, राज बिसारिया, बंसी कौल, प्रो. त्रिपुरारी शर्मा, माया राव और सौमित्र चटर्जी जैसे नाम इसकी शोभा बढ़ाएंगे.

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय भारत में रंगमच के क्षेत्र में पथप्रदर्शक है और इसने अब तक के सबसे सम्मानित अभिनेताओं और रंगमंच के दिग्गजों को प्रशिक्षित किया है. सन 1959 में स्थापित संस्थान के पास छह दशकों से रंगमंच में श्रेष्ठता की गौरवपूर्ण विरासत है. आठवें थियेटर ओलंपिक्स की मेज़बानी इस ऐतिहासिक संस्था उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण आयाम जोड़ेगा.

डेढ़ माह से भी लंबे वक्त तक चलने वाला यह आयोजन नाटकों, प्रतिभागियों और प्रदर्शनों के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव है. इस महोत्सव के दौरान अगरतला, अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, गुवाहाटी, इंफाल, जयपुर, जम्मू, कोलकाता, मुंबई, पटना, तिरुवनंतपुरम और वाराणसी में नाटकों का आयोजन किया जाएगा. जबकि इस दौरान ऑस्ट्रेलिया, अजेरबैजान, बांग्लादेश, बेल्जियम, ब्राजील, चीन, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, इज़राइल, इटली, जापान, लिथुआनिया, मॉरीशस, नेपाल, पोलैंड, रूस, श्रीलंका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका समेत 30 देशों के प्रतिभागी रंगमंच में अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन करेंगे.

रंगमंच के इस सबसे विशाल आयोजन के दौरान शबाना आज़मी, परेश रावल, मनोज जोशी, हिमानी शिवपुरी, सीमा बिस्वास और सौरभ शुक्ला जैसे रंगमंच और फिल्म उद्योग के दिग्गज भी इसमें शामिल होंगे.

इस दौरान 17 शहरों में इससे जुड़ी संगोष्ठियां, सम्मेलन, परिचर्चा और कार्यशालाओं जैसी गतिविधियों का भी आयोजन भी मशहूर शिक्षाविदों, विद्वानों, लेखकों, अभिनेताओं, डिजाइनरों और निर्देशकों द्वारा किया जाना तय हो चुका है. इससे जुड़े कार्यक्रमों में 60 ‘लिविंग लिजेंड्स’ सिरीज और 50 ‘मास्टर क्लासेज’ भी होंगी. आठवें थियेटर ओलंपिक्स के दौरान दिल्ली व मुंबई में दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और भोपाल, बेंगलुरु, चंडीगढ़, जयपुर, कोलकाता, वाराणसी में 6 राष्ट्रीय संगोष्ठियां भी आयोजित की जानी हैं.

‘ज्ञान को संरक्षित करने का सबसे श्रेष्ठ जरिया इसे आगे बढ़ाते जाना है’ कि भावना के साथ राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के सभी छात्र इस रंगमंच महोत्सव के लिए तैयार हैं. राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की यूथ फोरम ‘अद्वितीय 2018’ द्वारा युवाओं की आवाजें नुक्कड़ नाटकों, म्यूजिक बैंड, लघु नाटक लेखन और रंगमंच रिपोर्टिंग के माध्यम से दूर तक जाएंगी. रंगमंच की उभरती प्रतिभाओं को तराशने के लिए इस दौरान एक लघु नाटक लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें पहला पुरस्कार 1 लाख रुपये का जबकि 50 हजार रुपये का दूसरा और 25 हजार रुपये का तीसरा पुरस्कार दिया जाएगा.

केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. महेश शर्मा ने कहा, “मैं भारत को इस शानदार अवसर प्रदान करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रंगमंच समुदाय को धन्यवाद और शुभकामनाएं देता हूं. एक देश की पहचान इसकी संस्कृति की समृद्धि से होती है. हालांकि तकनीक ने हमारे जीवन को बदल दिया है, लेकिन रंगमंच की अपनी पहचान, ताकत और महत्व है. हम 65 वैश्विक प्रस्तुतियों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगम देखेंगे. रंगमंच हमारी ज़िंदगी का दर्पण हैं और एक बड़े मंच पर गहनता और खूबसूरती से सामाजिक मुद्दों को चित्रित करने वाला एक मजबूत और शक्तिशाली माध्यम है. भारत को आठवें थियेटर ओलंपिक्स 2018 की मेज़बानी और दुनिया में अपनी सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन करने पर गर्व है.”

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की अपर सचिव सुजाता प्रसाद ने कहा, “हमें खुशी है कि भारत उन राष्ट्रों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने इससे पहले थियेटर ओलंपिक्स की मेज़बानी की है. 300 से अधिक प्रतिष्ठित नाटकों के माध्यम से भारत का सांस्कृतिक कौशल नई ऊंचाइयों पर पहुंच जाएगा क्योंकि यह वैश्विक महोत्सव भारत में हो रहा है.”

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय सोसाएटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अर्जुन देव चारण का कहना है, “कला, संचार का सबसे प्रारंभिक रूप रहा है. किसी भी कलाकार को सबसे ज्यादा खुशी कला की सराहना करने वाले दर्शकों के सामने प्रदर्शन करने से मिलती है फिर चाहे वे दुनिया के किसी भी हिस्से से आए हों. एक तरह से रंगमंच कई संस्कृतियों और पंरपराओं को एक छत के नीचे लाकर एकजुट करने का शानदार माध्यम है. भारत में दुनिया के सबसे बड़े रंगमंच के महोत्सव को लाने पर हमें काफी गर्व है. 51 दिनों तक देशभर में चलने वाले इस आठवें थियेटर ओलंपिक्स महोत्सव के दौरान हम रंगमंच के जरिये तमाम मुल्कों की सरहदों को जोड़कर एक वैश्विक गांव बनाने का प्रयास करेंगे.”

दुनिया के सबसे बड़े रंगमंच के महोत्सव को भारत लाने की सोच रखने के साथ ही इसे संभव बनाने वाले राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक प्रो. वामन केंद्रे का दृढ़ विश्वास है कि हमारे देश की प्राचीन प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करने के लिए हमें इसे दुनिया की सांस्कृतिक महाशक्ति बनाना चाहिए.

प्रो. वामन केंद्रे कहते हैं, “पिछले तीन सालों से हमारा सपना था कि थिएटर ओलंपिक्स को भारत में लाएं. हमने जो सपना देखा था वह अब साकार हो गया है. चूंकि हमने इस उपलब्धि की कल्पना और इसे हासिल करने का प्रयास शुरू कर दिया था, इसलिए डॉ. महेश शर्मा और संस्कृति मंत्रालय ने इस विचार को पूरे दिल से समर्थन दिया है और इसे हकीकत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. हमारे अपने असाधारण नाटककार और नाटकीय चरित्र होने के बावजूद, सदियों में हमने शेक्सपीयर और बर्टोल्ट ब्रेक जैसे नाटककारों को भारतीय रंगमंच का हिस्सा बनते देखा है, हम अभी भी इस तरह के प्रभाव बनाने हैं. यह दुनिया के नक्शे पर भारतीय रंगमंच को ले जाने की दिशा में एक बड़ी छलांग है. हमें अपनी 2500 साल से ज्यादा पुरानी रंगमंच की विरासत पर गर्व होना चाहिए. रंगमंच की कला के जरिये आठवां थियेटर ओलंपिक सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करता है. इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के साथ हम अपनी रंगमंच की प्रथाओं, इसकी विविधताओं, दर्शन के साथ ही अपने लेखन, कथात्मकता और उनके वास्तविक सामर्थ्य और प्रस्तुतिकरण के माध्यमों को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करना चाहते हैं. इसके बदले में हम अतिथि कलाकारों की प्रथाओं, विचारधाराओं और उनके दर्शन का बाहें फैलाकर स्वागत करते हैं. इसका उद्देश्य भारतीय और वैश्विक कलाकारों के बीच चर्चा के लिए एक ऐसा मंच तैयार करना है जिससे कला की हमारी सामूहिक समझ और अभिव्यक्ति समृद्ध हो.”

थियेटर ओलंपिक्स

सन 1993 में थियेटर ओलंपिक्स की स्थापना ग्रीस के डेल्फी में की गई थी. एक अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव होने के नाते यह थियेटर ओलंपिक्स दुनिया भर के रंगमंच के सर्वश्रेष्ठ कलाकारों को सामने लेकर आता है. यह रंगमंच के आदान-प्रदान और छात्रों-विशेषज्ञों का मंच है जहां विचारधारा, संस्कृति और भाषाई विविधताओं के बावजूद संवाद को प्रोत्साहित किया जाता है. 1993 से थियेटर ओलंपिक्स को जापान (1999), रूस (2001), तुर्की (2006), दक्षिण कोरिया (2010), चीन (2014) और पोलैंड (2016) में सात बार आयोजित किया जा चुका है. भारत में आयोजित किए जाने वाले थियेटर ओलंपिक्स के इस नवीनतम संस्करण की थीम ‘फ्लैग ऑफ फ्रेंडशिप’ रखी गई है. भारत में आयोजित होने वाला यह बहुप्रतीक्षित ‘नाट्य महाकुंभ’ संपूर्ण विश्व से रचनात्मक सोच वाले कलाकारों को एक साथ लाने का प्रयास करता है.